शनिवार, 12 अगस्त 2017

२७२. जीवन

बूँद-दर-बूँद रिस रहा जीवन,
ऐसे कि ख़ुद को भी ख़बर नहीं,
अब भी बहुत कुछ बचा है रिसने को,
कौन जाने, ख़ाली हो जाय अभी-अभी.

अभी देखा तो ख़ुशी से पागल था वो,
अभी आँखों में है नमी उसकी,
पल-भर में सब बदल गया ऐसे,
एक पल में छिपे हों जैसे बरस कई.

अभी तो जीवन से भरा था वो,
नज़र फिरी कि सब कुछ ख़त्म हुआ,
जादू कहें इसे या नाटक कहें कोई,
जो सच-सा लगता है, सच है ही नहीं.

शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

२७१.मुसाफ़िर से

मुसाफ़िर,
तुम समझ रहे हो न
कि यह रेलगाड़ी है,
जो चल रही है,
तुम ख़ुद नहीं चल रहे.

मुसाफ़िर,
यह रेलगाड़ी है,
जो तुम्हें मंजिल तक पहुंचाएगी,
अगर यह रुक जाय,
तो शायद तुम पहुँच भी न पाओ 
अपने बूते.

मुसाफ़िर,
किसी ने तुम्हें स्टेशन पहुंचाया,
कोई तुम्हें स्टेशन से ले जाएगा,
तुम्हें पता भी नहीं चलेगा,
पर तुम्हें पग-पग पर 
किसी की ज़रूरत होगी.

मुसाफ़िर,
कभी-कभी हमें लगता है 
कि हम अकेले चल रहे हैं,
सब कुछ ख़ुद कर रहे हैं,
पर यह सच नहीं होता.

मुसाफ़िर,
वैसे तो तुम अकेले चल रहे हो,
हिम्मत का काम कर रहे हो,
पर यह न समझ लेना 
कि तुम्हारे अकेले चलने में 
किसी का योगदान नहीं है.

शनिवार, 29 जुलाई 2017

२७०. सपने में मुलाक़ात

जब कभी हम मिले,
तुम्हारे साथ कोई था.

मैं अब तक नहीं समझा 
कि मुझमें ऐसा क्या है,
जो तुम्हें मुझसे अकेले में 
मिलने से रोकता है,
ऐसा क्या है मुझमें 
जो मुझसे तुम्हें डराता है.

चलो, अबकी बार मिलो,
तो सपने में मिलना,
अकेले में तुमसे मिलने की 
मेरी तमन्ना पूरी तो हो,
सपने में ही सही.

शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

२६९. बूढ़ा


अपने आप से बात करता 
वह बूढ़ा बड़ा अजीब लगता है,
बेपरवाह, बेख़बर,
बस चलता जा रहा है 
अपनी ही धुन में,
ख़ुद से ही बतियाता.

एक वह भी वक़्त था,
जब घिरा रहता था वह 
चाहनेवालों से,
पर अब कोई नहीं,
न कोई दोस्त,
न कोई अपना,
किसी के काम का नहीं,
अब निपट अकेला है वह.

बूढ़ा मजबूर है,
जिससे कोई बात न करे,
वह ख़ुद से बात न करे,
तो और क्या करे?

शनिवार, 15 जुलाई 2017

२६८.ख़तरा

वह जो ख़ुद से 
बात कर रहा है,
इसलिए कर रहा है 
कि दूसरों से बात करने की 
उसको इजाज़त नहीं है.

डरते हैं सब उससे,
न जाने क्या बोल बैठे वह,
किसे शर्मिंदा कर दे, 
किसका नुकसान कर दे. 

पूरे होशो-हवास में है वह,
पर उसे चुप किया जा सके,
तो उसके बोलने का ख़तरा 
क्यों उठाया जाय?

वह ख़ुद से बात कर सकता है,
क्योंकि सबको लगता है,
इसमें कोई ख़तरा नहीं,
पर अनाड़ी हैं सब,
उन्हें नहीं पता 
कि ख़ुद से बात करने में ही 
सबसे ज़्यादा ख़तरा है.